Pratibimb / प्रतिबिम्ब

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नांव (Naav) – Udaan (2010)

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चढ़ती लहरें लांघ न पाए
क्यों हांफती-सी नांव है तेरी, नांव है तेरी
तिनका-तिनका जोड़ के सांसें
क्यों नापती सी नांव है तेरी, नांव है तेरी
उलटी बहती धार है बैरी, धार है बैरी
कि अब कुछ कर जा रे पंथी ….

जिगर जुटा के पाल बाँध ले
जो बात ठहरी जान पे तेरी, शान पे तेरी
हैय्या-हो कि तान साध ले
जो बात ठहरी जान पे तेरी, शान पे तेरी
चल जीत-जीत लहरा जा, परचम तू लाल फेहरा जा..
अब कर जा तू या मर जा, कर ले तैय्यारी…
उड़ जा बनके धूप का पंछी
छुड़ा के गहरी छाँव अँधेरी, छाँव अँधेरी
तिनका-तिनका जोड़ के सांसें
क्यों नापती सी नाव है तेरी, नांव है तेरी

रख देगा झकझोर के तुझे
तूफानों का घोर है डेरा, घोर है डेरा
भंवर से डर जो हार मान ले
काहे का फिर जोर है तेरा, जोर है तेरा
है दिल में रौशनी तेरे, तू चीर डाल सब घेरे
लहरों कि गर्दन कस के डाल फंदे रे …
कि दरिया बोले वाह ! रे पंथी
सर आँखों पे नांव है तेरी, नांव है तेरी …

चढ़ती लहरें लांघ न पाए
क्यों हांफती-सी नांव है तेरी,नांव है तेरी
उलटी बहती धार है बैरी, धार है बैरी
कि अब कुछ कर जा रे पंथी ….

Lyrics – Amitabh Bhattacharya

Written by timir

August 9, 2010 at 10:26 am

Posted in हिन्दी

One Response

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  1. good poems

    dikshita JAIN

    January 8, 2012 at 3:08 pm


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