Pratibimb / प्रतिबिम्ब

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Mirza Ghalib’s Ghazals (part-IV) : उनके देखे से (Unke Dekhe Se)

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उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं के बीमार का हाल अच्छा है

देखिये पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ ?
इक बिराहमण ने कहा है, के ये साल अच्छा है

उश्शाक़ = lovers , फ़ैज़ = profit

और बाज़ार से ले आये अगर टूट गया
साग़र-ए-जम से मेरा जाम-ए-सिफ़ाल अच्छा है

साग़र-ए-जम = Badshah Jamshed’s cup, जाम-ए-सिफ़ाल = clay cup

क़तरा दरिया में मिल जाये तो दरिया हो जाये
काम अच्छा है वोह, जिसका म’आल अच्छा है

म’आल = result

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को, “ग़ालिब” ये ख़याल अच्छा है

Written by timir

February 4, 2008 at 9:49 am

Posted in हिन्दी

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