Pratibimb / प्रतिबिम्ब

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नमस्कार बन्धुओं

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नमस्कार बन्धुओं ।
मुझे आज अपना पहला हिन्दी चिट्ठा लिखते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है । राष्ट्रधर्म हो या राष्ट्रभाषा,दोनों के ही प्रति हमारा कुछ कर्तव्य बनता है । हममें से बहुत लोग अपनी मातृभाषा से मुंह मोड़ लेने की भूल कर बैठते हैं । लेकिन हमारी जड़ें तो वहीं हैं — हिन्दी भाषा-सागर की अथाह गहराइयों में ।
  आज के इस आधुनिक युग में भारत जैसे विकासशील देश अंग्रेज़ी भाषा के प्रवाह के साथ बहना ही अपने लिए अधिक उपयुक्त समझते हैं । लेकिन हमें यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि हमारी पहचान,हमारी संस्कृति,हमारी ऐतिहासिक धरोहर,यहां तक कि हमारी एकता भी हिन्दी भाषा के अक्षरों में छिपी है ।

आशा करता हूँ कि इसमें मुझे आपका पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा ।

आपका परम् मित्र —
मानवेन्द्र राय चौधरी
चतुर्थ वर्ष, संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी (Computer Science and Engineering )
वेल्लूर प्रौद्योगिकी संस्थान,
वेल्लूर,तमिलनाडु ।

Written by timir

August 11, 2006 at 11:23 am

Posted in हिन्दी

One Response

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  1. मानवेन्द्र भाई,

    आपका हिन्दी चिट्ठा जगत मे स्वागत है। आपकी राष्ट्र, राष्ट्र-धर्म और हिन्दी के प्रति भावनाएं अत्यन्त पवित्र हैं।

    Anunad Singh

    September 13, 2006 at 10:06 am


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